आज का राहुकाल

आज का राहुकाल जानें और देखें कि दिन में राहुकाल, यमगण्ड काल और गुलिक काल कब शुरू और समाप्त होंगे। हिंदू पंचांग में इन समयों को अशुभ माना जाता है। यहां आप अपने स्थान के अनुसार इन तीनों कालों का समय देख सकते हैं।
⚠️ राहु काल एवं त्याज्य काल
राहुकाल क्या है?
राहुकाल, जिसे राहुकालम या राहु काल भी कहते हैं, वैदिक ज्योतिष का लगभग 90 मिनट का एक समय है । यह हर दिन सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच सभी दिन में आता है । जब राहुकल आता है उस समय को अशुभ माना जाता है और माना जाता है कि इसमें कोई नया या महत्वपूर्ण काम शुरू नहीं करना चाहिए ।
राहु और केतु को वैदिक ज्योतिष में छाया ग्रह माना जाता है । पौराणिक कथा के अनुसार, राहु एक असुर था, जिसे भगवान विष्णु ने दो टुकड़ों में काट दिया था , फिर उसके सिर का हिस्सा राहु और धर वाला हिस्सा केतु बना था । क्यूंकी राहु को अशुभ ग्रह माना जाता है, इसलिए इसके समय को शुभ कामों के लिए नहीं चुना जाता हैं ।
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राहुकाल का समय कैसे निकाला जाता है?
राहु काल का समय निकालने के लिए सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच के समय को 8 बराबर भागों में बाँट कर निकाला जाता है । हर भाग लगभग 90 मिनट या डेढ़ घंटे का होता है, लेकिन यह अलग अलग शहर में सूर्योदय के हिसाब से थोड़ा बदल सकता है ।
राहु काल कभी भी दिन के पहले भाग में नहीं आता हैं , यानी सूर्योदय के तुरंत बाद कभी नहीं आता हैं । बाकी के 7 भागों में से हर दिन एक भाग राहुकाल का समय होता है ।
पूरे सप्ताह के लिए राहुकाल का समय
यह समय तब होगा है , जब सूर्योदय सुबह 6:00 बजे और सूर्यास्त शाम 6:00 बजे हो। जैसा की पहले भी बताया गया है की अलग अलग शहर के हिसाब से यह बदलता रहता है ।
वार के अनुसार राहुकाल का समय
| दिन | राहुकाल का समय | भाग क्रम |
|---|---|---|
| सोमवार | सुबह 7:30 – 9:00 बजे | दूसरा भाग |
| मंगलवार | दोपहर 3:00 – 4:30 बजे | सातवाँ भाग |
| बुधवार | दोपहर 12:00 – 1:30 बजे | पाँचवाँ भाग |
| गुरुवार | दोपहर 1:30 – 3:00 बजे | छठा भाग |
| शुक्रवार | सुबह 10:30 – 12:00 बजे | चौथा भाग |
| शनिवार | सुबह 9:00 – 10:30 बजे | तीसरा भाग |
| रविवार | शाम 4:30 – 6:00 बजे | आठवाँ भाग |
राहुकाल में क्या करें और क्या नहीं करे ?
राहु काल नए कामों की शुरुआत के लिए अशुभ माना गया है । इस समय इन कामों से बचना चाहिए: जैसे नया बिज़नेस, गाड़ी, ज़मीन, गहने, फोन, लैपटॉप आदि की खरीदारी करना, कोई नई यात्रा शुरू करना, और शादी, सगाई जैसे अन्य शुभ संस्कार करने से बचना उचित माना गया हैं ।
माना जाता है कि राहुकल के समय राहु का असर होता है, जिससे भ्रम, जल्दबाज़ी और गलत फैसले हो सकते हैं । आप कोई चीज़ देखकर लालच में आ सकते हैं या उनमें छिपी हुई बुरी बातें को नज़रअंदाज़ कर सकते हैं।
राहुकाल का मतलब यह नहीं है कि आप यू ही हाथ पे हाथ रख कर बैठे रहे । आपका जो काम पहले से शुरू हैं, उन्हें जारी रख सकते है ।
राहु काल के लिए उपाय
आपको कोई ज़रूरी काम इस राहूकाल के समय करना पड़ जाए, तो आप इन उपायों को कर सकते हैं :
- “ॐ रां राहवे नमः” मंत्र 108 बार जाप करें
- भगवान गणेश या शिव की पूजा करें
- नीले फूल या काले तिल चढ़ाएँ
- भोजन और कंबल आदि का दान करें।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
7 दिनों के लिए राहुकाल कब होता है?
राहुकाल हर दिन लगभग 1.5 घंटे का होता है। सोमवार सुबह 7:30-9:00, मंगलवार दोपहर 3:00-4:30, बुधवार 12:00-1:30, गुरुवार 1:30-3:00, शुक्रवार 10:30-12:00, शनिवार 9:00-10:30 और रविवार शाम 4:30-6:00 बजे होता है। यह सूर्योदय के अनुसार थोड़ा बदल सकता है।
राहु काल से बचने के क्या उपाय हैं?
राहुकाल में शुभ काम शुरू न करें, अगर जरूरी हो तो हनुमान चालीसा पढ़ें या ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः मंत्र जपें। नीला कपड़ा पहनें, काले तिल का दान करें और यात्रा से पहले कुछ मीठा खाकर निकलें।
राहु काल में क्या वर्जित है?
राहुकाल में नया व्यापार, विवाह, गृहप्रवेश, यात्रा, बड़ी खरीदारी, यज्ञ-हवन या कोई शुभ कार्य शुरू न करें। संविदा पर हस्ताक्षर और महत्वपूर्ण मीटिंग भी नहीं करना चाहिए क्यूंकी माना जाता की इस समय शुरू किए कामों में बाधाएं आ सकती हैं।
राहुकाल और चौघड़िया में क्या अंतर है?
राहुकाल केवल एक काल है जो लगभग 1.5 घंटे का होता है , जबकि चौघड़िया पूरे दिन के शुभ-अशुभ समय बताता है। चौघड़िया पूरे दिन को 8 भागों में बांटता है, जिसमें शुभ (अमृत, शुभ, लाभ) और अशुभ (रोग, काल, उद्वेग) मुहूर्त होते हैं।
राहु काल और गुलिक काल में क्या अंतर है?
राहुकाल राहु से जुड़ा है और नए काम शुरू करने के लिए सबसे अशुभ माना जाता है। गुलिक काल शनि के पुत्र गुलिक से संबंधित है और इसमे शुरू किए काम दोबारा कीए जा सकते है।
राहुकाल और यमगण्ड में क्या अंतर है?
यमगण्ड यमराज से जुड़ा काल है, इस काल मे किए गए कामों का बुरा अंत या भारी नुकसान हो सकता है। वही राहुकाल राहु से जुड़ा है और नए काम शुरू करने के लिए सबसे अशुभ माना जाता है। दोनों है तो अशुभ लेकिन यमगण्ड को परिणाम की दृष्टि से ज्यादा खतरनाक माना जाता है।
