जन्म कुंडली

Free Janam Kundli

कुंडली को जन्म कुंडली, जन्म पत्रिका या Birth Chart के नाम से भी जाना जाता है। यह व्यक्ति के जन्म के समय आकाश में ग्रहों, राशियों और नक्षत्रों की स्थिति का ज्योतिषीय विवरण प्रस्तुत करती है। जन्म की तारीख, समय और स्थान के आधार पर तैयार की गई कुंडली में ग्रहों की स्थिति को अलग-अलग भावों और राशियों के संदर्भ में देखा जाता है। ऑनलाइन कुंडली कैलकुलेटर की सहायता से आप अपनी जन्म जानकारी दर्ज करके कुछ ही समय में कुंडली तैयार कर सकते हैं और उसके विभिन्न पहलुओं को समझ सकते हैं।

🔯 Enter Birth Details (जन्म विवरण प्रविष्ट करें)
ग्रह स्थिति एवं कुण्डली चक्र तैयार हो रहा है...
वैदिक खगोलीय गणना प्रगति पर है

Free Janam Kundli बनाएं ऑनलाइन

कुंडली बनाना अब बस एक क्लिक की बात रह गई है। इस मुफ्त कुंडली सॉफ्टवेयर से कुछ ही सेकंड में आपकी जन्म कुंडली तैयार हो जाती है, वो भी पूरी सटीकता के साथ। इसे कुंडली, जन्म कुंडली, जनम कुंडली, जन्मपत्री, वैदिक होरोस्कोप, वैदिक चार्ट, हिन्दू चार्ट या टेवा, अलग-अलग जगहों पर लोग इसे अपने-अपने तरीके से पुकारते हैं। नाम चाहे कुछ भी हो, बात एक ही रहती है: जन्म के वक्त ग्रहों और नक्षत्रों की भचक्र में जो स्थिति होती है, उसी का एक सांचा।

एक टैप में आपको अपनी जन्म कुंडली हिन्दी और अंग्रेजी, दोनों भाषाओं में मिल जाएगी। सबसे खास बात, यहां D1 लग्न कुंडली से लेकर D60 षष्ट्यंश चक्र तक, सारे उन्नीस वर्ग-चक्र पूरी तरह मुफ्त मिलते हैं, जो आमतौर पर बड़ी-बड़ी साइटों पर भी पूरे नहीं मिल पाते।

कुंडली सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कैसे करें

इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करने के लिए इतना भर करना है:

  • अपना पूरा नाम भरें
  • जन्म तिथि डालें
  • जन्म का सही समय डालें (जितना पक्का हो सके, उतना बेहतर)
  • जन्म स्थान भरें
  • लिंग चुनें

यह सब भरने के बाद सबमिट दबाते ही आपकी जन्म कुंडली सामने आ जाएगी।

हमारा Free Janam Kundli सॉफ्टवेयर आपको क्या-क्या देता है

केवल एक साधारण चार्ट नहीं, बल्कि पूरा एक ज्योतिषीय विश्लेषण मिलता है:

  • ग्रहों, राशि-स्वामियों और भावों से युक्त ज्यामितीय कुंडली चार्ट
  • लग्न, चन्द्र और सूर्य कुंडली के अलावा D1 से D60 तक के सभी वर्ग-चक्र (होरा, द्रेष्काण, नवमांश, दशमांश, त्रिंशांश जैसे सभी अठारह विभाजित चार्ट), सब कुछ बिल्कुल मुफ्त
  • नक्षत्र: जन्म के समय चन्द्रमा जिस नक्षत्र में रहा, वह व्यक्तित्व और भाग्य पर असर डालता है
  • लग्न: जन्म के वक्त पूर्वी क्षितिज पर उदय होने वाली राशि, यह बाहरी व्यक्तित्व और जीवन के प्रति नजरिए को आकार देती है
  • राशि: वह राशि जिसमें कोई ग्रह, खासकर चन्द्रमा या सूर्य, कुंडली में बैठा है
  • नक्षत्र स्वामी: जन्म नक्षत्र का शासक ग्रह, जो व्यवहार और जीवनशैली को प्रभावित करता है
  • योग: ग्रहों का एक खास संयोजन, जो जीवन में कोई विशेष असर या नतीजा लेकर आता है
  • तिथि: जन्म के समय सूर्य और चन्द्रमा के बीच के कोण पर आधारित चन्द्र दिवस
  • कुंडली दोष, जैसे मांगलिक दोष, कालसर्प दोष, पितृ दोष, चाहे मौजूद हो या न हो, दोनों स्थिति साफ बताई जाती है
  • राहु, केतु, शनि जैसे ग्रहों की महादशा और अंतर्दशा का पूरा विवरण
  • वैदिक ज्योतिष और अंकज्योतिष से जुड़ी अनुकूल जानकारी
  • उपाय: रत्न धारण करना, मंत्र जाप, पूजा-पाठ, दान-पुण्य जैसे सुझाव

जन्म कुंडली या जन्म चार्ट आखिर है क्या

जन्म कुंडली को जीवन के एक ब्रह्मांडीय खाके की तरह समझा जा सकता है। वैदिक ज्योतिषी जन्म तिथि, जन्म स्थान और जन्म समय के आधार पर यह कुंडली तैयार करते हैं। यह एक रोडमैप जैसी होती है, जो जन्म के वक्त ग्रहों, राशियों, भावों और तमाम बड़े ज्योतिषीय पहलुओं की ठीक-ठीक स्थिति दिखाती है। कहा जाता है कि इन्हीं पहलुओं के आधार पर ज्योतिषी किसी जातक के जीवन की घटनाओं और आने वाले अवसरों को पहचानने की कोशिश करते हैं।

भारत में सदियों पुरानी एक परंपरा रही है, बच्चे के जन्म होते ही उसकी कुंडली बनवा ली जाती है, ताकि आने वाले पूरे जीवन का एक वृत्तांत हमेशा साथ रहे।

जन्म कुंडली पढ़ने के फायदे

जीवन के उतार-चढ़ाव से निपटना सीखें: अच्छे और बुरे समय को पहले से पहचान पाना आसान हो जाता है, ताकि उसी हिसाब से खुद को तैयार किया जा सके।

जीवन का मकसद सामने लाती है: ऐसा माना जाता है कि कुंडली भाग्य और कर्मिक पैटर्न को उजागर करने में मदद करती है, जीवन की यात्रा के लिए एक मार्गदर्शक नक्शे जैसी।

बेहतर फैसले लेने में मदद: करियर, पढ़ाई, प्रेम, विवाह, धन और परिवार से जुड़े फैसलों में एक व्यक्तिगत मार्गदर्शन मिल जाता है।

दोषों से निपटने में सहायक: चुनौतियों का सामना करने और बाधाओं को समझने में मदद मिलती है, साथ ही उन्हें दूर करने के उपाय भी सामने आ जाते हैं।

रिश्तों में सामंजस्य: परिवार, दोस्तों और जीवनसाथी के साथ अपने रिश्तों को बेहतर समझने में मदद मिलती है, आपसी तालमेल और समझ बढ़ती है।

खुद को गहराई से जानना: अपने बारे में एक गहरी समझ बनती है, आत्म-जागरूकता बढ़ती है। इसे व्यक्तिगत विकास और आत्म-खोज की एक कड़ी भी कहा जा सकता है।

सेहत और आध्यात्मिक विकास: शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्तर पर व्यक्ति कैसा महसूस कर रहा है, इसके कुछ संकेत भी कुंडली से मिल जाते हैं।

कुंडली के 12 भाव क्या दर्शाते हैं?

  1. पहला भाव: यह भाव व्यक्ति के स्वभाव, व्यक्तित्व और जीवनशैली को दर्शाता है।
  2. दूसरा भाव: यह भाव आर्थिक स्थिति, परिवार और बोलचाल से जुड़ा माना जाता है।
  3. तीसरा भाव: साहस, आत्मविश्वास और प्रयास इस भाव से देखे जाते हैं।
  4. चौथा भाव: घर, वाहन, माता और सुख-सुविधाओं का संबंध चौथे भाव से माना जाता है।
  5. पांचवां भाव: यह भाव शिक्षा, प्रेम संबंध और संतान सुख को दर्शाता है।
  6. छठा भाव: स्वास्थ्य, कर्ज और विरोधियों से जुड़ी बातें इस भाव से देखी जाती हैं।
  7. सातवां भाव: विवाह, पार्टनरशिप और रिश्तों का विश्लेषण सातवें भाव से किया जाता है।
  8. आठवां भाव: यह भाव अचानक घटनाओं, रहस्यों और आयु से जुड़ा माना जाता है।
  9. नवां भाव: भाग्य, धर्म और यात्रा से जुड़ी बातें इस भाव से देखी जाती हैं।
  10. दसवां भाव: करियर, नौकरी और सामाजिक प्रतिष्ठा का संबंध दसवें भाव से होता है।
  11. ग्यारहवां भाव: आय, लाभ और इच्छाओं की पूर्ति इस भाव से देखी जाती है।
  12. बारहवां भाव: खर्च, विदेश यात्रा और मानसिक शांति का संबंध बारहवें भाव से माना जाता है।

जन्म कुंडली में 9 ग्रहों का महत्व

  1. सूर्य: आत्मविश्वास, नेतृत्व और सरकारी क्षेत्र का कारक माना जाता है।
  2. चंद्र: मन, भावनाएं और मानसिक स्थिति को दर्शाता है।
  3. मंगल: ऊर्जा, साहस और भूमि से जुड़ा ग्रह माना जाता है।
  4. बुध: बुद्धि, व्यापार और संवाद क्षमता का कारक है।
  5. गुरु: ज्ञान, भाग्य और विवाह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  6. शुक्र: प्रेम, सुख-सुविधा और वैवाहिक जीवन को प्रभावित करता है।
  7. शनि: कर्म, मेहनत और संघर्ष का ग्रह माना जाता है।
  8. राहु: अचानक बदलाव, भ्रम और विदेश से जुड़ा माना जाता है।
  9. केतु: आध्यात्म और वैराग्य का कारक माना जाता है।

कुंडली मिलान

विवाह से पहले कुंडली मिलान भी वैदिक ज्योतिष की एक पुरानी और सार्थक पद्धति मानी जाती है, अष्टकूट मिलान के नाम से जानी जाने वाली यह पद्धति नक्षत्रों पर आधारित होती है। इसमें वैवाहिक बिंदुओं के हिसाब से अंक दिए जाते हैं, जितने ज्यादा अंक मिलें, वैवाहिक जीवन में उतना ही सामंजस्य रहने की संभावना मानी जाती है। हालांकि यह पद्धति सिर्फ शादी तक सीमित नहीं है, थोड़े संशोधन के बाद इसे किसी भी दो व्यक्तियों के बीच आपसी तालमेल समझने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

लग्न चार्ट क्या होता है?

लग्न चार्ट कुंडली का सबसे अहम हिस्सा माना जाता है। जन्म के समय की राशि पर आधारित यह चार्ट व्यक्ति के बाहरी स्वभाव, शिक्षा और रिश्तों जैसी बातों की झलक देता है।

कुंडली या लग्न चार्ट कैसे पढ़ें?

इसके लिए बारह भावों में ग्रहों की स्थिति और राशियों को साथ में देखना पड़ता है, तभी जीवन के अलग-अलग पहलुओं की तस्वीर साफ बनती है। अनुभव के साथ ही इसे ठीक से पढ़ पाना आसान होता जाता है।

कुंडली के भाव कैसे समझें?

हर भाव में बैठे ग्रह और उनकी राशियां मिलकर व्यक्तित्व, करियर, रिश्ते, सेहत और धन जैसी बातों का संकेत देते हैं। एक साथ देखने पर ही पूरी तस्वीर उभरती है।

कुंडली कितनी सटीक होती है?

कुंडली को व्यक्तित्व, जीवन के ढर्रे और आने वाली चुनौतियों को लेकर काफी हद तक सटीक माना जाता है। हालांकि यह जन्म विवरण की सटीकता और पढ़ने वाले की समझ पर भी काफी कुछ निर्भर करता है।

नवमांश (D9) चार्ट क्या है?

यह कुंडली का एक विभाजित चार्ट है, राशि को नौ हिस्सों में बांटकर बनाया जाता है। भाग्य और वैवाहिक जीवन जैसी बातों को समझने के लिए इसे मुख्य कुंडली के साथ देखा जाता है।

क्या सारे वर्ग-चक्र (D1 से D60) यहां मुफ्त मिलते हैं?

D1 लग्न कुंडली से लेकर D60 षष्ट्यंश चक्र तक सभी उन्नीस चार्ट यहां बिना किसी शुल्क के उपलब्ध हैं।

ग्रहों की दृष्टि कैसे देखी जा सकती है?

कुंडली चार्ट में किसी भी ग्रह पर टैप करते ही उसकी दृष्टि लाइन के रूप में दिख जाती है, साथ ही यह भी पता चल जाता है कि वह किन भावों पर असर डाल रहा है।

जन्म तारीख और समय इतने जरूरी क्यों हैं?

जन्म तारीख, समय और स्थान से ही ग्रहों और भावों की सही स्थिति तय होती है, जो पूरी कुंडली की बुनियाद बनती है। इसमें जरा सी भी गड़बड़ी पूरी गणना को प्रभावित कर सकती है।