आज का शुभ मुहूर्त

आज का शुभ मुहूर्त

आज का शुभ मुहूर्त : यहां आपको दिन के शुभ समय की जानकारी देता है। अपने स्थान का चयन करके अभिजीत मुहूर्त और अन्य शुभ मुहूर्त देख सकते हैं और पूजा, यात्रा या नए काम की शुरुआत के लिए उपयुक्त समय चुन सकते हैं।

ग्रह-नक्षत्र गणना जारी है...

✨ आज के शुभ मुहूर्त

🪷 ब्रह्म मुहूर्त--
✅ अभिजित मुहूर्त--
🏆 विजय मुहूर्त--
🌄 गोधूलि मुहूर्त--
🌅 प्रातः संध्या--
🌇 सायं संध्या--
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आज का शुभ मुहूर्त – Aaj Ka Shubh Muhurat

इस लेख में आज के शुभ मुहूर्त से जुड़ी लगभग हर बात एक जगह समझाई गई है। कौन सा मुहूर्त कब आता है, किस काम के लिए कौन सा समय अच्छा माना जाता है, और किन समयों में शुभ काम टालने की सलाह दी जाती है।

शुभ मुहूर्त का मतलब क्या होता है

मुहूर्त का सीधा मतलब है समय का एक खास हिस्सा। पुराने हिसाब में एक दिन को 30 मुहूर्त में बांटा गया, यानी हर मुहूर्त करीब 48 मिनट का। इनमें से कुछ समय शुभ माने गए है और कुछ अशुभ।

ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति हर पल बदलती रहती है, और इसी वजह से हर पल का स्वभाव थोड़ा अलग होता है। जिस समय की स्थिति काम के अनुकूल बैठे, उसी को उस काम का शुभ मुहूर्त कहा जाता है।

पंचांग से मुहूर्त कैसे निकलता है

मुहूर्त निकालने का आधार पंचांग है। इसमें पांच चीजें देखी जाती हैं: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। साथ में उस समय की लग्न और चंद्रमा की स्थिति भी देखी जाती है। इन सबको मिलाकर तय होता है कि कोई समय किस काम के लिए ठीक रहेगा। इसीलिए एक ही दिन में कोई घड़ी पूजा के लिए अच्छी हो सकती है और वही घड़ी यात्रा के लिए ठीक नहीं मानी जाती।

दिन मे शुभ मुहूर्त

हर दिन कुछ ऐसे समय आते हैं जिन्हें अपने आप में शुभ माना जाता है। इनके लिए अलग से कोई योग बनने का इंतजार नहीं करना पड़ता।

ब्रह्म मुहूर्त

सूर्योदय से करीब डेढ़ घंटे पहले शुरू होकर लगभग 48 मिनट तक रहता है। इसे पूजा, जप, ध्यान और पढ़ाई के लिए सबसे अच्छा समय कहा जाता है। सुबह का शांत माहौल भी इसकी एक वजह बताई जाती है।

अभिजीत मुहूर्त

दिन के ठीक बीच का करीब 48 मिनट का समय, जो अक्सर दोपहर के आसपास आता है। इसे दिन का सबसे शुभ मुहूर्त माना जाता है। कहा जाता है कि इसमें किए गए काम में रुकावट कम आती है। कुछ परंपराओं में बुधवार को इसका असर नहीं गिना जाता।

विजय मुहूर्त

दोपहर के बाद का करीब 48 मिनट का समय। नई शुरुआत, कोई मुकाबला या किसी बड़े काम में जीत की कामना हो, तो इस समय को अच्छा बताया जाता है। विजयादशमी पर इसी मुहूर्त में शस्त्र पूजन की परंपरा है।

गोधूलि मुहूर्त

सूर्यास्त के आसपास का थोड़ा सा समय, जब पुराने जमाने में गायें चरकर घर लौटती थीं और उनके खुरों से उड़ी धूल से आसमान धुंधला हो जाता था। विवाह के लिए इसे खास तौर पर शुभ माना जाता है, और कई बार दूसरे मुहूर्त न मिलने पर इसी समय में शादी तय की जाती है।

प्रदोष काल

सूर्यास्त के बाद का करीब सवा दो घंटे का समय। शिव पूजा, दीपावली की लक्ष्मी पूजा और धनतेरस जैसे अवसरों पर इसी समय को चुना जाता है।

निशिता काल

आधी रात के आसपास का समय। दीपावली की रात और कुछ तंत्र-साधना वाली पूजाओं में इसका महत्व बताया जाता है। आम घरेलू काम के लिए इसे आमतौर पर नहीं देखा जाता।

योग वाले शुभ मुहूर्त

कुछ दिन ऐसे होते हैं जब वार और नक्षत्र का खास मेल बन जाता है। इन्हें अलग से शुभ योग कहा जाता है।

सर्वार्थ सिद्धि योग

तय वार और तय नक्षत्र के मेल से बनता है। नाम का मतलब है सभी कामों में सिद्धि देने वाला योग। इसमें किए गए ज्यादातर शुभ काम सफल माने जाते हैं।

अमृत सिद्धि योग

यह भी वार और नक्षत्र के खास मेल से बनता है। इसे बहुत शुभ योग कहा जाता है, और खरीदारी या नई शुरुआत के लिए लोग इसका इंतजार करते हैं।

रवि योग

सूर्य और चंद्रमा के नक्षत्रों की दूरी से बनने वाला योग है। माना जाता है कि यह कई छोटी-मोटी रुकावटों के असर को कम कर देता है।

पुष्य नक्षत्र

नक्षत्रों में इसे सबसे शुभ गिना जाता है। जब यह रविवार को आए तो रवि पुष्य, और गुरुवार को आए तो गुरु पुष्य कहलाता है। सोना, गाड़ी, घर और जरूरी सामान की खरीदारी के लिए इन दिनों का खास इंतजार किया जाता है।

इन योगों की सही तारीख और समय हर महीने बदलते रहते हैं, इसलिए इन्हें पंचांग या ऊपर दिए गए टूल से ही देखना ठीक रहता है।

अबूझ मुहूर्त क्या होते हैं

कुछ दिन ऐसे माने गए हैं जिनमें अलग से मुहूर्त निकलवाने की जरूरत नहीं समझी जाती। इन्हें अबूझ मुहूर्त कहा जाता है। यानी वह दिन अपने आप में इतना शुभ है कि कोई भी मांगलिक काम बिना अलग से पूछे किया जा सकता है।

आमतौर पर इनमें ये दिन गिने जाते हैं – अक्षय तृतीया, देवउठनी एकादशी, वसंत पंचमी और भड़ली नवमी। कई जगह विजयादशमी और धनतेरस को भी इसी श्रेणी में रखा जाता है।

अलग-अलग काम के लिए शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त: इसमें वर-वधू की कुंडली, तिथि, नक्षत्र और लग्न, सब देखे जाते हैं। आमतौर पर रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तराफाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, उत्तराभाद्रपद और रेवती जैसे नक्षत्र विवाह के लिए अच्छे बताए जाते हैं। गुरु और शुक्र का अस्त होना, खरमास और चातुर्मास के समय विवाह टालने की परंपरा है।

गृह प्रवेश मुहूर्त: नए घर में रहना शुरू करने से पहले शुभ तिथि, शुभ नक्षत्र और स्थिर लग्न देखी जाती है। पंचक, चातुर्मास और खरमास को आमतौर पर टाला जाता है। साथ में वास्तु पूजन और हवन की भी परंपरा है।

वाहन खरीद मुहूर्त: नई गाड़ी लेने के लिए पुष्य नक्षत्र, अबूझ दिन, शुभ चौघड़िया या अभिजीत मुहूर्त पसंद किए जाते हैं। कई लोग गुरुवार, शुक्रवार या सोमवार को शुभ मानते हैं।

नामकरण संस्कार: परंपरा में बच्चे के जन्म के 11वें या 12वें दिन नामकरण करने की बात मिलती है। कई परिवार अपनी सुविधा और पंडित जी की सलाह से कोई और शुभ दिन भी चुन लेते हैं।

अन्नप्राशन और मुंडन: अन्नप्राशन यानी बच्चे को पहली बार अन्न खिलाने की रस्म, जो आमतौर पर छठे-सातवें महीने में की जाती है। मुंडन और कर्णवेध भी शुभ तिथि और शुभ नक्षत्र देखकर कराए जाते हैं।

व्यापार या दुकान की शुरुआत: नई दुकान, नया ऑफिस या नया काम शुरू करने के लिए लाभ और अमृत चौघड़िया, अभिजीत मुहूर्त और स्थिर लग्न को बताया जाता है।

सोना और जमीन-जायदाद की खरीद: इसके लिए पुष्य नक्षत्र, अक्षय तृतीया, धनतेरस और अबूझ दिनों को लोग खास तौर पर चुनते हैं।

यात्रा का मुहूर्त: यात्रा के लिए चर, शुभ और लाभ चौघड़िया देखी जाती है, साथ में दिशाशूल का भी ध्यान रखा जाता है। परंपरा के अनुसार सोमवार और शनिवार को पूर्व दिशा, मंगलवार और बुधवार को उत्तर दिशा, गुरुवार को दक्षिण दिशा, और शुक्रवार और रविवार को पश्चिम दिशा में यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है।

आज का शुभ मुहूर्त कैसे देखें

ऊपर दिए गए टूल में अपना शहर चुनकर आज और कल, दोनों दिन का मुहूर्त देखा जा सकता है। इसमें आज के शुभ समय, राहुकाल और बाकी जरूरी जानकारी एक ही जगह मिल जाती है। यह जानकारी रोज अपने आप अपडेट होती रहती है, तो हर बार दिन के हिसाब से सही समय सामने आता है।

यह जानकारी पंचांग और पारंपरिक ज्योतिष की प्रचलित मान्यताओं पर आधारित है। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में मुहूर्त देखने के तरीके में थोड़ा फर्क भी मिलता है। बड़े और जरूरी कामों के लिए अपने परिवार के पंडित जी या किसी योग्य जानकार से सलाह लेना बेहतर रहता है।

शुभ मुहूर्त से जुड़े सवाल

आज का सबसे शुभ मुहूर्त कौन सा माना जाता है?

रोज का सबसे शुभ समय अभिजीत मुहूर्त माना जाता है, जो दिन के बीच में करीब 48 मिनट का होता है। इसके अलावा ब्रह्म मुहूर्त भी पूजा और ध्यान के लिए बहुत अच्छा कहा जाता है।

अबूझ मुहूर्त का क्या मतलब है?

अबूझ मुहूर्त उस दिन को कहते हैं जो अपने आप में इतना शुभ माना जाता है कि अलग से मुहूर्त पूछने की जरूरत नहीं समझी जाती। अक्षय तृतीया, देवउठनी एकादशी और वसंत पंचमी इसके आम उदाहरण हैं।

क्या मुहूर्त शहर के हिसाब से बदलता है?

सूर्योदय और सूर्यास्त के समय पर टिके होने की वजह से राहुकाल, अभिजीत और चौघड़िया जैसे समय हर शहर में थोड़े अलग होते हैं। इसीलिए अपना शहर चुनकर देखना सही रहता है।

आज का शुभ मुहूर्त कैसे देखें?

आप harinav.com पर अपना शहर चुनकर आज और कल, और अन्य किसी भी दिन का शुभ मुहूर्त देख सकते है , वो भी फ्री मे ।