Ashtakvarga Calculator

ज्योतिष में अष्टकवर्ग का उपयोग कुंडली में ग्रहों के प्रभाव और विभिन्न भावों की शक्ति को समझने के लिए किया जाता है। Ashtakvarga Calculator की मदद से आप अपनी जन्म कुंडली की अष्टकवर्ग मे ग्रहों के बल, भावों की स्थिति और गोचर के प्रभाव को समझ और देख सकते है ।
कुंडली में अष्टकवर्ग
वैदिक ज्योतिष में कुंडली पढ़ने के कई तरीके हैं, पर इनमें एक तरीका ऐसा है जो पूरी तरह गणित पर टिका है, अंदाजे पर नहीं। इसे अष्टकवर्ग कहा जाता है। यह बृहत् पराशर होरा शास्त्र में वर्णित एक प्रणाली है, जिसमें हर भाव और हर ग्रह को कुछ शुभ अंक (बिंदु) दिए जाते हैं, और इन्हीं बिंदुओं से यह समझा जाता है कि जीवन का कौन सा क्षेत्र मजबूत है और कौन सा कमजोर।
अष्टकवर्ग क्या है
“अष्टकवर्ग” दो शब्दों से मिलकर बना है, अष्ट यानी आठ, और वर्ग यानी समूह। यहां “आठ” का मतलब है लग्न और सात ग्रह (सूर्य से लेकर शनि तक), यानी कुल आठ चीजें मिलकर हर राशि को अंक देती हैं। इन्हीं अंकों को बिंदु कहा जाता है, और इन बिंदुओं के जोड़ से ही किसी भाव या विषय का शुभ-अशुभ फल तय होता है।
भिन्नाष्टकवर्ग और सर्वाष्टकवर्ग में अंतर
भिन्नाष्टकवर्ग
यह किसी एक ग्रह की अलग से गणना है, यानी देखा जाता है कि वह ग्रह बाकी ग्रहों और लग्न के साथ मिलकर किस राशि में कितने बिंदु दे रहा है। जब कोई ग्रह गोचर में किसी राशि से गुजरता है, तो उसी राशि में उस ग्रह का भिन्नाष्टकवर्ग देखकर उस समय का फल समझा जाता है।
सर्वाष्टकवर्ग
इसमें सभी ग्रहों के दिए हुए बिंदुओं को जोड़कर एक सामूहिक गणना की जाती है, जिसे समुदाय अष्टकवर्ग भी कहा जाता है। इससे यह पता चलता है कि कोई खास राशि या भाव कुल मिलाकर कितना मजबूत है।
अष्टकवर्ग के सभी बिंदुओं का मतलब
हर ग्रह, बाकी सात ग्रहों और लग्न की स्थिति को ध्यान में रखकर हर राशि को 0 से 8 के बीच कोई अंक देता है। 0 सबसे कमजोर और 8 सबसे शुभ माना जाता है।
| बिंदु | क्या फल माना जाता है |
|---|---|
| 0 | दुर्घटना, वियोग, मानसिक बेचैनी |
| 1 | दुर्भाग्य, रोग, मानसिक कष्ट |
| 2 | क्लेश, हानि, गुस्सा |
| 3 | असंतुलन, सेहत और धन की हानि |
| 4 | मिश्रित फल, सुख-दुख दोनों |
| 5 | बाधाओं पर जीत, अनुकूल बदलाव |
| 6 | मेहनत से मिलने वाली सफलता |
| 7 | शुभ, समाज में सम्मान, पारिवारिक सुख |
| 8 | बेहद शुभ, राजसुख, प्रतिष्ठा और ऐश्वर्य |
अष्टकवर्ग में कुल बिंदु
पूरी अष्टकवर्ग प्रणाली में कुल 337 बिंदु होते हैं, और बारह राशियों में बांटने पर औसतन हर राशि को करीब 28 बिंदु मिलते हैं। इसी औसत के आधार पर किसी भाव की ताकत आंकी जाती है:
- 25 से कम बिंदु: यह संघर्ष का संकेत माना जाता है, इस भाव से जुड़े कामों में देरी और ज्यादा मेहनत की जरूरत पड़ सकती है
- 25 से 29 बिंदु: सामान्य स्थिति, यहां फल काफी हद तक अपने कर्म और उस समय के गोचर पर निर्भर करता है
- 30 या उससे ज्यादा बिंदु: बेहद शुभ स्थिति, इस राशि से गुजरने वाला ग्रह बिना ज्यादा अड़चन के सफलता, धन और स्थिरता देता है
अष्टकवर्ग में गोचर का फल
जब कोई ग्रह गोचर करते हुए किसी राशि से गुजरे, तो उस राशि में उस ग्रह के भिन्नाष्टकवर्ग के बिंदु देखे जाते हैं:
- 6 या उससे ज्यादा बिंदु हों, तो फल शुभ माना जाता है
- 3 या उससे कम बिंदु हों, तो रोग, बाधा या कष्ट की आशंका रहती है
- 4 या 5 बिंदु हों, तो फल मिला-जुला माना जाता है
उदाहरण के लिए, अगर गुरु कर्क राशि में गोचर कर रहे हों और उस राशि में गुरु के भिन्नाष्टकवर्ग में 6 बिंदु हों, तो शिक्षा, विवाह या संतान जैसे क्षेत्रों में तरक्की की संभावना बढ़ जाती है।
अष्टकवर्ग में ग्रहो का बल
अष्टकवर्ग सिर्फ अंक निकालने की विधि नहीं, बल्कि यह बताने का भी तरीका है कि कोई ग्रह कुंडली में कैसा फल देगा। जैसे चन्द्रमा की बात करें तो, अगर चन्द्रमा बली और अच्छी स्थिति में हो, तो व्यक्ति को दयालु, भावुक और समाज के भले के लिए काम करने वाला बताया जाता है, मन से साफ और शांत स्वभाव का। वहीं कमजोर या पीड़ित चन्द्रमा मानसिक परेशानी और उलझन भरी सोच की तरफ इशारा करता है।
इसी तरह सूर्य अगर अच्छी स्थिति में हो, तो व्यक्ति को आत्मबल, नेतृत्व क्षमता और सफलता के रास्ते पर आगे बढ़ने वाला माना जाता है। कमजोर सूर्य होने पर यही गुण पाना मुश्किल माना जाता है। यही वजह है कि कुंडली में हर ग्रह के बिंदुओं की जांच करना फलादेश में काफी मददगार समझा जाता है।
अष्टकवर्ग के फायदा
- यह समझने में मदद मिलती है कि जीवन का कौन सा क्षेत्र मजबूत है और कहां सुधार की गुंजाइश है।
- किसी ग्रह के गोचर के दौरान कौन सा समय अनुकूल है और कब सावधानी बरतनी चाहिए, यह साफ तौर पर समझ आ जाता है।
- जिस भाव में बिंदु ज्यादा हों, उसे पूर्वजन्म के शुभ कर्मों का फल मिलने का संकेत माना जाता है, और कम बिंदु वाला भाव बाकी बचे कर्मों के असर की तरफ इशारा करता है।
- जिन भावों में बिंदु कम हों, वहां संबंधित ग्रह के उपाय करके संतुलन बनाने की कोशिश की जाती है। त्रिकोण शोधन और एकाधिपत्य शोधन जैसी विधियां इसी दिशा में इस्तेमाल होती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अष्टकवर्ग में कुल कितने बिंदु होते हैं?
अष्टकवर्ग के पूरी प्रणाली में कुल 337 बिंदु होते हैं, जिन्हें बारह राशियों में बांटने पर औसतन हर राशि को करीब 28 बिंदु मिलते हैं।
भिन्नाष्टकवर्ग और सर्वाष्टकवर्ग में से कौन महत्वपूर्ण है?
भिन्नाष्टकवर्ग किसी एक ग्रह के गोचर-फल के लिए देखा जाता है, जबकि सर्वाष्टकवर्ग पूरे भाव की सामूहिक ताकत समझने के लिए उपयोगी माना जाता है।
किसी भाव में बिंदु कम हों तो क्या मतलब है?
कम बिंदु संघर्ष का संकेत जरूर देते हैं, पर इसका मतलब है ज्यादा मेहनत और धैर्य की जरूरत, न कि स्थायी रूप से बुरा फल।
गोचर के समय अष्टकवर्ग क्यों देखा जाता है?
किसी ग्रह के गोचर का असली फल जानने के लिए उस राशि में उस ग्रह के बिंदु देखना जरूरी माना जाता है, इसी से पता चलता है कि वह समय अनुकूल रहेगा या नहीं।
