कुबेर चालीसा पाठ | धन के देवता कुबेर के मंत्र और प्रमुख मंदिर

कुबेर चालीसा भगवान कुबेर को समर्पित एक प्रसिद्ध भक्तिमय स्तुति और प्रार्थना है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान कुबेर को धन के देवता, देवताओं के कोषाध्यक्ष और यक्षों के राजा के रूप में जाना जाता है। उन्हें धन, समृद्धि, वैभव और ऐश्वर्य का प्रतीक माना जाता है।

जै जै जै श्री कुबेर भण्डारी ।
धन माया के तुम अधिकारी॥
तप तेज पुंज निर्भय भय हारी ।
पवन वेग सम सम तनु बलधारी॥

स्वर्ग द्वार की करें पहरे दारी ।
सेवक इंद्र देव के आज्ञाकारी॥
यक्ष यक्षणी की है सेना भारी ।
सेनापति बने युद्ध में धनुधारी॥

महा योद्धा बन शस्त्र धारैं।
युद्ध करैं शत्रु को मारैं॥
सदा विजयी कभी ना हारैं ।
भगत जनों के संकट टारैं॥

प्रपितामह हैं स्वयं विधाता ।
पुलिस्ता वंश के जन्म विख्याता॥
विश्रवा पिता इडविडा जी माता ।
विभीषण भगत आपके भ्राता॥

शिव चरणों में जब ध्यान लगाया ।
घोर तपस्या करी तन को सुखाया॥
शिव वरदान मिले देवत्य पाया ।
अमृत पान करी अमर हुई काया॥

धर्म ध्वजा सदा लिए हाथ में ।
देवी देवता सब फिरैं साथ में ।
पीताम्बर वस्त्र पहने गात में ।
बल शक्ति पूरी यक्ष जात में॥

स्वर्ण सिंहासन आप विराजैं ।
त्रिशूल गदा हाथ में साजैं॥
शंख मृदंग नगारे बाजैं ।
गंधर्व राग मधुर स्वर गाजैं॥

चौंसठ योगनी मंगल गावैं ।
ऋद्धि सिद्धि नित भोग लगावैं॥
दास दासनी सिर छत्र फिरावैं ।
यक्ष यक्षणी मिल चंवर ढूलावैं॥

ऋषियों में जैसे परशुराम बली हैं ।
देवन्ह में जैसे हनुमान बली हैं॥
पुरुषोंमें जैसे भीम बली हैं ।
यक्षों में ऐसे ही कुबेर बली हैं॥

भगतों में जैसे प्रहलाद बड़े हैं ।
पक्षियों में जैसे गरुड़ बड़े हैं॥
नागों में जैसे शेष बड़े हैं ।
वैसे ही भगत कुबेर बड़े हैं॥

कांधे धनुष हाथ में भाला ।
गले फूलों की पहनी माला॥
स्वर्ण मुकुट अरु देह विशाला।
दूर दूर तक होए उजाला॥

कुबेर देव को जो मन में धारे ।
सदा विजय हो कभी न हारे ।।
बिगड़े काम बन जाएं सारे ।
अन्न धन के रहें भरे भण्डारे॥

कुबेर गरीब को आप उभारैं ।
कुबेर कर्ज को शीघ्र उतारैं॥
कुबेर भगत के संकट टारैं ।
कुबेर शत्रु को क्षण में मारैं॥

शीघ्र धनी जो होना चाहे ।
क्युं नहीं यक्ष कुबेर मनाएं॥
यह पाठ जो पढ़े पढ़ाएं ।
दिन दुगना व्यापार बढ़ाएं॥

भूत प्रेत को कुबेर भगावैं ।
अड़े काम को कुबेर बनावैं॥
रोग शोक को कुबेर नशावैं ।
कलंक कोढ़ को कुबेर हटावैं॥

कुबेर चढ़े को और चढ़ादे ।
कुबेर गिरे को पुन: उठा दे॥
कुबेर भाग्य को तुरंत जगा दे ।
कुबेर भूले को राह बता दे॥

प्यासे की प्यास कुबेर बुझा दे ।
भूखे की भूख कुबेर मिटा दे॥
रोगी का रोग कुबेर घटा दे ।
दुखिया का दुख कुबेर छुटा दे॥

बांझ की गोद कुबेर भरा दे ।
कारोबार को कुबेर बढ़ा दे॥
कारागार से कुबेर छुड़ा दे ।
चोर ठगों से कुबेर बचा दे॥

कोर्ट केस में कुबेर जितावै ।
जो कुबेर को मन में ध्यावै॥
चुनाव में जीत कुबेर करावैं ।
मंत्री पद पर कुबेर बिठावैं॥

पाठ करे जो नित मन लाई ।
उसकी कला हो सदा सवाई॥
जिसपे प्रसन्न कुबेर की माई ।
उसका जीवन चले सुखदाई॥

जो कुबेर का पाठ करावै ।
उसका बेड़ा पार लगावै ॥
उजड़े घर को पुन: बसावै।
शत्रु को भी मित्र बनावै॥

सहस्त्र पुस्तक जो दान कराई।
सब सुख भोद पदार्थ पाई ।
प्राण त्याग कर स्वर्ग में जाई ।
मानस परिवार कुबेर कीर्ति गाई॥

कुबेर भगवान के प्रमुख मंत्र

भगवान कुबेर को धन, वैभव और समृद्धि से संबंधित देवता के रूप में पूजा जाता है। कुबेर की आराधना में अलग-अलग परंपराओं के अनुसार विभिन्न मंत्रों का जाप किया जाता है। इनमें कुबेर मूल मंत्र, कुबेर गायत्री मंत्र और लक्ष्मी-कुबेर मंत्र प्रमुख हैं।

कुबेर मूल मंत्र

ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्यपदये धनसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥

कुबेर मंत्र

ॐ कुबेराय नमः॥

कुबेर गायत्री मंत्र

ॐ यक्षराजाय विद्महे वैश्रवणाय धीमहि।
तन्नो कुबेरः प्रचोदयात्॥

लक्ष्मी-कुबेर मंत्र

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।
ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय नमः॥

कुबेर बीज मंत्र

ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः॥

कुबेर भगवान के व्रत और महत्वपूर्ण तिथियां

  • अक्षय तृतीया (धन-समृद्धि पूजा) – 19 अप्रैल 2026 (रविवार)
  • धनतेरस (कुबेर पूजा) – 6 नवंबर 2026 (शुक्रवार)
  • दीपावली (लक्ष्मी-कुबेर पूजन) – 8 नवंबर 2026 (रविवार)
  • कार्तिक पूर्णिमा / कुबेर जयंती – 24 नवंबर 2026 (मंगलवार)

कुबेर भगवान के प्रमुख मंदिर

मंदिरस्थान
कुबेर मंदिरअलवर, राजस्थान
कुबेर तीर्थरामेश्वरम, तमिलनाडु
कुबेर मंदिरउज्जैन, मध्य प्रदेश
कुबेर मंदिरवाराणसी, उत्तर प्रदेश
कुबेर मंदिरद्वारका, गुजरात
कुबेर मंदिरहरिद्वार, उत्तराखंड

भगवान कुबेर से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न ( FAQs )

कुबेर चालीसा कब पढ़ना चाहिए?

कुबेर चालीसा शुक्रवार, पूर्णिमा, धनतेरस, दीपावली या अक्षय तृतीया को पढ़ना सबसे शुभ माना जाता है। रोजाना सुबह या शाम स्नान के बाद भी पाठ कर सकते हैं। व्यापार वृद्धि और धन स्थिरता के लिए नियमित पाठ फायदेमंद होता है। श्रद्धा से पढ़ने पर कुबेर जी प्रसन्न होते हैं।

कुबेर चालीसा कितनी बार पढ़ें?

कुबेर चालीसा रोजाना एक बार जरूर पढ़ें। विशेष लाभ के लिए 11, 21 या 108 दिन तक लगातार पाठ करें। धनतेरस या दीपावली पर ज्यादा बार पढ़ने से धन प्राप्ति और आर्थिक बाधाएं दूर होती हैं। मन लगाकर पढ़ना जरूरी है।

धनतेरस पर कुबेर चालीसा पढ़ सकते हैं?

हां, धनतेरस पर कुबेर चालीसा पढ़ना अत्यंत शुभ और फलदायी है। इस दिन लक्ष्मी-कुबेर की संयुक्त पूजा होती है। चालीसा पाठ से घर में धन का आगमन होता है और तिजोरी भरी रहती है। पूजा के बाद चालीसा अवश्य पढ़ें।

कुबेर जी का मूल मंत्र क्या है?

कुबेर जी का मूल मंत्र है – ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनं मे देहि दापय स्वाहा।
अन्य मंत्र: ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं कुबेराय नमः। नियमित जाप से धन और समृद्धि मिलती है।

कुबेर पूजा कैसे करें?

साफ स्थान पर कुबेर जी की तस्वीर या यंत्र रखें। गणेश जी का ध्यान करके दीप-धूप जलाएं। पीले फूल, धनिया, चावल और मिठाई अर्पित करें। मंत्र जाप करें, चालीसा पढ़ें और आरती उतारें। धनतेरस या शुक्रवार को विशेष रूप से करें।

क्या लक्ष्मी जी के साथ कुबेर जी की पूजा करनी चाहिए?

हां, लक्ष्मी जी के साथ कुबेर जी की पूजा अवश्य करनी चाहिए। लक्ष्मी धन लाती हैं और कुबेर उसकी रक्षा व स्थिरता देते हैं। धनतेरस और दीपावली पर दोनों की संयुक्त पूजा सबसे फलदायी मानी जाती है। इससे घर में स्थायी समृद्धि आती है।

यदि आप पंचांग, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त और ज्योतिष से जुड़ी धार्मिक जानकारी नियमित रूप से पढ़ना चाहते हैं, तो हमारी समय-समय पर प्रकाशित होने वाले लेख भी अवश्य देखें। इस जानकारी को अपने परिवार और मित्रों के साथ साझा करें।

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