दुर्गा पूजा विधि – Durga Puja Vidhi In Hindi
नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा को शास्त्रों में एक तय क्रम में करने की परंपरा बताई गई है, इसे षोडशोपचार पूजा यानी सोलह चरणों कहा जाता है। हर चरण में देवी को कुछ अर्पित करते हुए एक खास मंत्र बोला जाता है, यहाँ आपको यह पूरी विधि, चरण-दर-चरण, मंत्रों के साथ दी जा रही है।

दुर्गा पूजा की तैयारी
दुर्गा पूजा शुरू करने से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहन लिए जाते हैं। पूजा स्थान को गंगाजल छिड़ककर पवित्र किया जाता है, और मां दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर एक साफ चौकी पर स्थापित की जाती है। सामने पुष्प, अक्षत, धूप-दीप, नैवेद्य जैसी सामग्री पहले से सजाकर रख ली जाती है।
1. ध्यान एवं आवाहन
सबसे पहले देवी का ध्यान किया जाता है, फिर आवाहन मुद्रा (दोनों हथेलियां मिलाकर अंगूठे अंदर की ओर मोड़कर) बनाते हुए उन्हें पूजा स्थान पर आने का निमंत्रण दिया जाता है।
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
2. आसन
आवाहन के बाद अंजलि में पांच फूल लेकर देवी को आसन ग्रहण करने का निवेदन किया जाता है।
अनेकरत्नसंयुक्तं नानामणिगणान्वितम्।
कार्तस्वरमयं दिव्यमासनं प्रतिगृह्यताम्॥
3. पाद्य (चरण प्रक्षालन)
देवी के चरण धोने के लिए जल अर्पित किया जाता है, यह सम्मान देने का एक पारंपरिक तरीका माना जाता है।
गङ्गादिसर्वतीर्थेभ्यो मया प्रार्थनयाहृतम्।
तोयमेतत्सुखस्पर्शं पाद्यार्थं प्रतिगृह्यताम्॥
4. अर्घ्य
इसके बाद सुगंधित जल हाथों में अर्घ्य के रूप में अर्पित किया जाता है।
गन्धपुष्पाक्षतैर्युक्तमर्घ्यं सम्पादितं मया।
गृहाण त्वं महादेवि प्रसन्ना भव सर्वदा॥
5. आचमन
देवी को आचमन हेतु जल अर्पित किया जाता है, यह भी शुद्धि और सत्कार का एक भाव माना जाता है।
आचम्यतां त्वया देवि भक्तिं मे ह्यचलां कुरु।
ईप्सितं मे वरं देहि परत्र च परां गतिम्॥
6. स्नान
पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर मिलाकर) से देवी को स्नान कराया जाता है।
पयोदधि घृतं क्षीरं सितया च समन्वितम्।
पञ्चामृतमनेनाद्य कुरु स्नानं दयानिधे॥
7. वस्त्र
स्नान के बाद देवी को नए वस्त्र अर्पित किए जाते हैं।
वस्त्रं च सोमदैवत्यं लज्जायास्तु निवारणम्।
मया निवेदितं भक्त्या गृहाण परमेश्वरि॥
8. आभूषण
वस्त्र के बाद आभूषण अर्पित करने की परंपरा है।
हारकङ्कणकेयूर-मेखलाकुण्डलादिभिः।
रत्नाढ्यं कुण्डलोपेतं भूषणं प्रतिगृह्यताम्॥
9. चन्दन
देवी को चंदन का लेप अर्पित किया जाता है।
परमानन्दसौभाग्यं परिपूर्णं दिगन्तरे।
गृहाण परमं गन्धं कृपया परमेश्वरि॥
10. कुंकुम
अखंड सौभाग्य के प्रतीक स्वरूप रोली या कुमकुम अर्पित किया जाता है।
कुङ्कुमं कान्तिदं दिव्यं कामिनीकामसम्भवम्।
कुङ्कुमेनार्चिते देवि प्रसीद परमेश्वरि॥
11. काजल
इसके बाद देवी को काजल अर्पित किया जाता है।
कज्जलं कज्जलं रम्यं सुभगे शान्तिकारिके।
कर्पूरज्योतिरुत्पन्नं गृहाण परमेश्वरि॥
12. मंगल-द्रव्य (सौभाग्य-सूत्र, इत्र, हल्दी, अक्षत)
इस चरण में एक साथ कई मांगलिक चीजें अर्पित की जाती हैं। पहले सौभाग्य-सूत्र:
सौभाग्यसूत्रं वरदे सुवर्णमणिसंयुते।
कण्ठे बध्नामि देवेशि सौभाग्यं देहि मे सदा॥
फिर सुगंधित द्रव्य (इत्र):
चन्दनागरुकर्पूरैः संयुतं कुङ्कुमं तथा।
कस्तूर्यादिसुगन्धाश्च सर्वाङ्गेषु विलेपनम्॥
फिर हल्दी:
हरिद्रारञ्जिते देवि सुखसौभाग्यदायिनी।
तस्मात्त्वां पूजयाम्यत्र सुखशान्तिं प्रयच्छ मे॥
और अंत में अक्षत:
रञ्जिताः कुङ्कुमौद्येन न अक्षताश्चातिशोभनाः।
ममैषां देवि दानेन प्रसन्ना भव शोभने॥
13. पुष्पांजलि
देवी को फूलों की अंजलि अर्पित की जाती है।
मन्दारपारिजातादि-पाटलीकेतकानि च।
जातीचम्पकपुष्पाणि गृहाणेमानि शोभने॥
14. बिल्वपत्र
बिल्वपत्र को देवी का प्रिय माना जाता है, इसे श्रद्धापूर्वक अर्पित किया जाता है।
अमृतोद्भव-श्रीवृक्षो महादेवि! प्रियः सदा।
बिल्वपत्रं प्रयच्छामि पवित्रं ते सुरेश्वरि॥
15. धूप
धूप जलाकर देवी को सुगंध अर्पित की जाती है।
दशाङ्गगुग्गुलं धूपं चन्दनागरुसंयुतम्।
समर्पितं मया भक्त्या महादेवि! प्रतिगृह्यताम्॥
16. दीप
घी का दीपक जलाकर देवी के सामने रखा जाता है।
घृतवर्त्तिसमायुक्तं महातेजो महोज्ज्वलम्।
दीपं दास्यामि देवेशि! सुप्रीता भव सर्वदा॥
17. नैवेद्य
फल-मिठाई का भोग अर्पित किया जाता है, इसे देवी को भोजन कराने के समान माना जाता है।
अन्नं चतुर्विधं स्वादु रसैः षड्भिः समन्वितम्।
नैवेद्यं गृह्यतां देवि! भक्तिं मे ह्यचलां कुरु॥
18. ऋतुफल
मौसमी फल जैसे नारियल, केला, अंगूर आदि अर्पित किए जाते हैं।
द्राक्षाखर्जूरकदली-फलसाम्रकपित्थकम्।
नारिकेलेक्षुजम्ब्वादि-फलानि प्रतिगृह्यताम्॥
19. आचमन (पुनः)
भोग के बाद फिर से आचमन कराया जाता है।
कामारिवल्लभे देवि कुर्वाचमनमम्बिके।
निरन्तरमहं वन्दे चरणौ तव चण्डिके॥
20. नारियल
विशेष रूप से नारियल अर्पित करने की भी परंपरा है।
नारिकेलं च नारङ्गीं कलिङ्गमञ्जिरं त्वया।
उर्वारुकं च देवेशि फलान्येतानि गृह्यताम्॥
21. ताम्बूल
पान-सुपारी अर्पित की जाती है।
एलालवङ्गं कस्तूरी कर्पूरैः पुष्पवासिताम्।
वीटिकां मुखवासार्थं समर्पयामि सुरेश्वरि॥
22. दक्षिणा
देवी को दक्षिणा (द्रव्य) अर्पित की जाती है।
पूजाफलसमृद्धयर्थं तवाग्रे स्वर्णमीश्वरी।
स्थापितं तेन मे प्रीता पूर्णान् कुरु मनोरथम्॥
23. पुस्तक-पूजन एवं कन्या-पूजन
पूजा में इस्तेमाल हुई धार्मिक पुस्तकों का भी पूजन किया जाता है:
नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नमः।
नमः प्रकृत्यै भद्रायै नियताः प्रणताः स्मताम्॥
इसके बाद जल रहे दीपक का पूजन:
शुभं भवतु कल्याणमारोग्यं पुष्टिवर्द्धनम्।
आत्मतत्त्वप्रबोधाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥
और अंत में कन्या-पूजन, जिसमें छोटी कन्याओं को भोजन कराकर दक्षिणा या उपहार दिया जाता है, यह मानकर कि इनमें देवी का ही अंश बसता है:
सर्वस्वरूपे! सर्वेशे सर्वशक्ति स्वरूपिणी।
पूजां गृहाण कौमारि! जगन्मातर्नमोऽस्तु ते॥
24. नीराजन (आरती)
कपूर से देवी की आरती की जाती है।
नीराजनं सुमाङ्गल्यं कर्पूरेण समन्वितम्।
चन्द्रार्कवह्निसदृशं महादेवि! नमोऽस्तु ते॥
25. प्रदक्षिणा
आरती के बाद फूलों के साथ देवी की प्रतीकात्मक परिक्रमा की जाती है।
प्रदक्षिणं त्रयं देवि प्रयत्नेन प्रकल्पितम्।
पश्याद्य पावने देवि अम्बिकायै नमोऽस्तु ते॥
26. क्षमा-प्रार्थना
अंत में पूजा के दौरान अनजाने में हुई किसी भी कमी के लिए देवी से क्षमा मांगी जाती है, यह हर पूजा का एक जरूरी हिस्सा माना जाता है।
अपराधशतं देवि मत्कृतं च दिने दिने।
क्षम्यतां पावने देवि देवेशि नमोऽस्तु ते॥
अगर पूरी विधि करना संभव न हो
शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि अगर समय या साधन की कमी हो, तो पूरे सोलह उपचार की जगह सिर्फ पंचोपचार (गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य) से भी पूजा पूरी की जा सकती है। कहा जाता है कि देवी भाव और श्रद्धा को सबसे ज्यादा महत्व देती हैं, चरणों की गिनती को नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
माँ दुर्गा की स्तुति मंत्र क्या है?
मां दुर्गा का मुख्य बीज मंत्र है : ॐ दुं दुर्गायै नमः।
दुर्गा पूजा के 10 दिन कौन से हैं?
दुर्गा पूजा या नवरात्रि के 9 दिन माँ के नौ रूपों की पूजा होती है : शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री। दसवां दिन विजयादशमी है, जब माँ की विजय मनाई जाती है और दुर्गा विसर्जन होता है।
दुर्गा पूजा का क्या महत्व है?
दुर्गा पूजा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। माँ दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था। नवरात्रि में पूजा करने से शक्ति, साहस, समृद्धि और सुरक्षा मिलती है।
माँ दुर्गा की स्तुति मंत्र क्या है?
माँ दुर्गा की प्रसिद्ध स्तुति मंत्र है :
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
अथवा सर्वमंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तुते॥
षोडशोपचार पूजा में कितने चरण होते हैं?
इसमें सोलह मुख्य उपचार होते हैं, हालांकि मंगल-द्रव्य और पुस्तक-कन्या पूजन जैसे कुछ चरणों में एक साथ कई अर्पण शामिल होने से कुल क्रम सोलह से ऊपर पहुंच जाता है।
दुर्गा पूजा कब है ?
इस साल दुर्गा पूजा की शुरुवात 11 october 2026 से 21 october 2026 तक होगा , सप्तमी 18 october , अष्टमी 19 october और दशहरा 20 october – 2026 को होगा।



