धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त
धनतेरस को धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। यह दीपावली के पांच दिनों वाले त्योहार की शुरुआत मानी जाती है, और इसी दिन से घरों में साफ-सफाई और खरीदारी का माहौल जोर पकड़ता है।

धनत्रयोदशी पूजा का सही समय कौन सा माना जाता है ?
धनतेरस की मुख्य पूजा प्रदोष काल में करने की सलाह दी जाती है। प्रदोष काल सूर्यास्त के तुरंत बाद शुरू होता है और करीब सवा दो घंटे तक रहता है। कहा जाता है कि इसी समय के दौरान पूजा करना सबसे शुभ माना जाता है।
चौघड़िया मुहूर्त के बारे में एक बात समझनी जरूरी है, यह मुहूर्त मुख्य रूप से यात्रा शुरू करने या कोई नया काम आरंभ करने के लिए देखा जाता है, धनतेरस जैसी पूजा के लिए इसे आधार बनाना उचित नहीं समझा जाता। पूजा के लिए प्रदोष काल के साथ-साथ यह भी देखा जाता है कि उस वक्त कौन सी लग्न चल रही है।
साल 2026 मे धनतेरस पूजा
6 नवम्बर , 2026 – शुक्रवार
कुछ बड़े शहरों में धनत्रयोदशी पूजा के लिए मुहूर्त
| शहर | समय (शुभ मुहूर्त) |
|---|---|
| पुणे | 06:32 PM से 08:31 PM |
| नई दिल्ली | 06:02 PM से 07:57 PM |
| चेन्नई | 06:14 PM से 08:10 PM |
| जयपुर | 06:11 PM से 08:07 PM |
| हैदराबाद | 06:15 PM से 08:13 PM |
| गुरुग्राम | 06:03 PM से 07:59 PM |
| चण्डीगढ़ | 06:00 PM से 07:54 PM |
| कोलकाता | 05:28 PM से 07:26 PM |
| मुम्बई | 06:35 PM से 08:35 PM |
| बेंगलूरु | 06:25 PM से 08:20 PM |
| अहमदाबाद | 06:30 PM से 08:28 PM |
| नोएडा | 06:01 PM से 07:57 PM |
स्थिर लग्न को इतना महत्व क्यों दिया जाता है?
ज्योतिष में लग्नों को तीन तरह का माना गया है, चर, स्थिर और द्विस्वभाव। इनमें वृषभ राशि को स्थिर लग्न कहा जाता है। मान्यता है कि अगर धनतेरस की पूजा स्थिर लग्न में की जाए, तो मां लक्ष्मी घर में स्थायी रूप से निवास करने लगती हैं, यानी जो सुख-समृद्धि पूजा से मिलती है, वह लंबे समय तक टिकी रहती है। दीपावली के आस-पास के दिनों में वृषभ लग्न ज्यादातर प्रदोष काल के साथ ही मिल जाती है, इसी वजह से त्रयोदशी तिथि, प्रदोष काल और स्थिर (वृषभ) लग्न, तीनों का एक साथ मिलना धनतेरस पूजा के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जाता है।
चूंकि लग्न का समय हर शहर के अक्षांश-देशांतर के हिसाब से थोड़ा आगे-पीछे होता रहता है, इसलिए मुहूर्त देखते वक्त अपने शहर का चयन करना जरूरी होता है, तभी सही समय मिल पाता है।
धनतेरस को धन्वन्तरि जयंती भी क्यों कहा जाता है?
इसी दिन को धन्वन्तरि त्रयोदशी या धन्वन्तरि जयंती के नाम से भी मनाया जाता है। भगवान धन्वन्तरि को आयुर्वेद का जनक और देवता माना जाता है, कहा जाता है कि समुद्र मंथन के दौरान वे अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसी वजह से धनतेरस के दिन स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना के साथ भी पूजा की जाती है, यह सिर्फ धन-संपत्ति तक सीमित त्योहार नहीं माना जाता।
यम दीपम क्यों जलाया जाता है ?
धनत्रयोदशी की शाम एक और खास परंपरा निभाई जाती है, घर के मुख्य द्वार के बाहर, दक्षिण दिशा की ओर मुख करके एक दीपक जलाया जाता है, इसे यम दीपम या यम दीपदान भी कहा जाता है। यमराज को मृत्यु के देवता के रूप में जाना जाता है, और यह दीपक उन्हीं को समर्पित माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि यह दीपक जलाने से परिवार में किसी की भी अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। यह रस्म त्रयोदशी तिथि के दिन ही निभाई जाती है, और इसे बाकी पूजा से अलग, स्वतंत्र रूप से किया जाता है।
धनतेरस का शुभ मुहूर्त क्या है?
धनतेरस के लिए शुभ मुहूर्त इस प्रकार से है :
धनतेरस पूजा मुहूर्त: शाम 6:02 बजे से शाम 7:57 बजे तक
प्रदोष काल: शाम 5:33 बजे से रात 8:09 बजे तक
वृषभ काल (स्थिर लग्न): शाम 6:02 बजे से शाम 7:57 बजे तक
त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 6 नवंबर 2026 को सुबह 10:30 बजे से
त्रयोदशी तिथि समाप्त: 7 नवंबर 2026 को सुबह 10:47 बजे तक
क्या धनतेरस के दिन पैसे देना चाहिए?
धनतेरस के दिन पैसे खर्च करना शुभ माना जाता है। इस दिन सोना, चांदी, बर्तन या अन्य शुभ वस्तुएं खरीदने से लक्ष्मी और कुबेर की कृपा मिलती है।
धनतेरस पर कितने दीपक जलाने चाहिए?
धनतेरस पर घर के मुख्य द्वार पर यम दीप जरूर जलाएं। घर के अंदर 11, 13, 21 या जितने संभव हों उतने दीपक जला सकते हैं।
धनतेरस को क्या खरीदना चाहिए?
धनतेरस पर सोना, चांदी, पीतल या तांबे के बर्तन, नई झाड़ू, दीपक, धनिया के बीज और हल्दी की गांठ खरीदना बहुत शुभ माना जाता है।
धनतेरस पर कौन सी 5 चीजें खरीदें?
सोना या चांदी (सिक्का या गहना)
पीतल/तांबे का बर्तन
नई झाड़ू
साबुत धनिया के बीज
हल्दी की गांठ या दीपक
ये पांच चीजें खरीदन धनतेरस के दिन शुभ माना गया है इस से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।



